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क्रिप्टो लॉबिंग 2026: राजनेता और अरबों के नए कानून

  • Elena C.
  • अप्रै. 07, 2026
  • 1 minute read

2026 तक आते-आते क्रिप्टो इंडस्ट्री की छवि पूरी तरह बदल चुकी है। यह अब कोई "विद्रोही स्टार्टअप" नहीं, बल्कि कैपिटल हिल और ब्रुसेल्स का सबसे आक्रामक और रईस लॉबीस्ट बन चुका है। जहाँ 2024 में ये कंपनियाँ सिर्फ हाथ-पाँव मार रही थीं, वहीं 2026 के अमेरिकी मिडटर्म चुनाव (Midterms) तक उन्होंने इतना भारी-भरकम "वॉर चेस्ट" (चुनावी बजट) तैयार कर लिया है, जो रक्षा और बैंकिंग सेक्टर के साझा खर्च को भी पीछे छोड़ देता है।

1. कुबेर का खजाना: कौन और कितना पैसा लगा रहा है?

इसका मुख्य खिलाड़ी 'Fairshake' बना हुआ है—एक विशाल सुपर-PAC (राजनीतिक कार्रवाई समिति), जिसने 2026 की शुरुआत तक अपने खातों में $193 मिलियन से अधिक की रकम जमा कर ली है।

प्रमुख चंदा देने वाले:

  • Coinbase: अमेरिका के इस सबसे बड़े एक्सचेंज ने अब "टोटल कवरेज" की रणनीति अपना ली है। सिर्फ 2025 में ही कंपनी ने राज्य स्तर पर लॉबिंग के लिए रिकॉर्ड तोड़ पैसे पानी की तरह बहाए हैं (खासकर कैलिफोर्निया में, जहाँ गवर्नर की कुर्सी दांव पर है)।
  • A16Z (Andreessen Horowitz): यह वेंचर कैपिटल दिग्गज उन उम्मीदवारों पर करोड़ों डॉलर लुटा रहा है, जो विकेंद्रीकरण (Decentralization) और Web3 के लिए खड़े होने को तैयार हैं।
  • Ripple: SEC के खिलाफ अदालती लड़ाई में मिली आंशिक जीत के बाद, कंपनी ने अपने भारी-भरकम कानूनी बजट का रुख अब सीधे राजनीति की तरफ मोड़ दिया है।

अंदर की बात: 2026 में क्रिप्टो लॉबी और AI लॉबी के बीच एक गहरी सांठगांठ देखने को मिल रही है। "Leading the Future" जैसी समितियाँ उन्हीं लोगों से फंड ले रही हैं जो क्रिप्टो-PAC चला रहे हैं। इनका मकसद "डेटा संप्रभुता" और एआई में कंटेंट की असलियत जाँचने के लिए ब्लॉकचेन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

2. राजनीतिक चहेते: "क्रिप्टो-गुट" के चेहरे

पैसा राजनीति के दोनों पक्षों में बह रहा है, लेकिन अब असली ध्यान उन "टेक्नो-ऑप्टिमिस्टों" (तकनीक-प्रेमी नेताओं) पर है जो क्रिप्टो के प्रति वफादार हैं।

  • Barry Moore (R-AL): सीनेट की रेस में उन्हें Fairshake का सबसे ज्यादा साथ मिला है। उनका पूरा कैंपेन संपत्तियों को खुद के पास सुरक्षित रखने (Self-custody) के अधिकार पर टिका है।
  • Jessica Steinmann (R-TX): टेक्सास की यह उम्मीदवार अपनी वेबसाइट पर खुलेआम "चीन के खिलाफ अमेरिकी क्रिप्टो प्रभुत्व" का नारा देती हैं। उन्हें इस इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों से $5 लाख से ज्यादा का समर्थन मिल चुका है।
  • क्रिप्टो-डेमोक्रेट्स: पार्टी के पुराने और सख्त नेताओं के बावजूद, डेमोक्रेट्स का युवा गुट (खासकर ऑस्टिन और सैन फ्रांसिस्को जैसे टेक हब्स में) खुलकर चंदा ले रहा है। इनका मकसद खुद को Fairshake के "हमले" से बचाना है, जैसा 2024 में कैटी पोर्टर के साथ हुआ था।

निशाने पर दुश्मन: लॉबिस्ट सिर्फ दोस्त ही नहीं बना रहे, बल्कि दुश्मनों को मजा भी चखा रहे हैं। 2026 में कांग्रेसी नेता अल ग्रीन (Al Green, D-TX) और स्टेबलकॉइन्स पर पाबंदी लगाने की कोशिश करने वाले अन्य आलोचक सीधे तौर पर उनके निशाने पर आ गए हैं।

3. विधायी एजेंडा: वे क्या "पास" कराना चाहते हैं?

2026 में लड़ाई अब क्रिप्टो को मान्यता दिलाने की नहीं, बल्कि वित्तीय ढांचे (Financial Infrastructure) पर कब्जा करने की है।

प्रमुख बिल:

  • FIT21 (Financial Innovation and Technology for the 21st Century Act): यह सबसे बड़ी जंग है। लॉबिस्ट एक साफ़ बंटवारा चाहते हैं: क्या "डिजिटल कमोडिटी" है (जिसे CFTC संभालेगा) और क्या "सिक्योरिटी" है (जिसे SEC संभालेगा)। लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा एसेट्स को SEC की सख्त निगरानी से बाहर निकाला जा सके।
  • स्टेबलकॉइन बिल (Stablecoin Bill): क्रिप्टो दिग्गज स्टेबलकॉइन्स को भुगतान के वैध माध्यम के रूप में कानूनी जामा पहनाने पर अड़े हैं। वे चाहते हैं कि सिर्फ बैंक ही नहीं, बल्कि प्राइवेट कंपनियाँ भी इन्हें जारी कर सकें (बशर्ते उनके पास अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स में 100% रिजर्व हो)।
  • CLARITY Act (Digital Asset Market Clarity Act): 2026 का नया दांव, जिसका उद्देश्य मार्केट का एक स्पष्ट ढांचा तैयार करना और राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल वस्तुओं के व्यापार को वैध बनाना है।

4. वैश्विक संदर्भ: यूरोपीय संघ में 'MiCA 2' और "डिजिटल पासपोर्ट"

यूरोप में लॉबिंग का मिजाज थोड़ा अलग है। 1 जुलाई 2026 से MiCA (Markets in Crypto-Assets) के अंतिम प्रावधान लागू हो रहे हैं।

  • पासपोर्टिंग सुविधा: लॉबिस्ट "सिंगल लाइसेंस" का अधिकार पाने में सफल रहे हैं। यानी अगर कोई कंपनी एक यूरोपीय देश में रजिस्टर्ड है, तो वह सभी 27 देशों में काम कर सकेगी। अब लिथुआनिया और माल्टा जैसे देशों में "नरम" नियमों के लिए पैरवी की जा रही है।
  • RWA (Real World Assets) की जंग: 2026 में बॉन्ड्स और रियल एस्टेट के टोकनाइजेशन को आसान बनाने वाले कानूनों के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यह पारंपरिक वित्तीय बाजार (TradFi) को ब्लॉकचेन की पटरी पर लाने की एक बड़ी कोशिश है।

5. विश्लेषण और परिकल्पना: यह अभी क्यों जरूरी है?

  • "चार साल के चक्र का अंत": Grayscale और Coinbase के विश्लेषक 2026 में खुलेआम कह रहे हैं कि इस संस्थागत लॉबिंग ने क्रिप्टो के पुराने उतार-चढ़ाव वाले चक्र को खत्म कर दिया है। कानूनों की वजह से पेंशन फंड और ETF से आने वाला पैसा अब स्थाई हो गया है, जिससे बाजार में स्थिरता तो आई है, लेकिन अब यह वॉशिंगटन के फैसलों का गुलाम बन चुका है।
  • तकनीकी पेंच: लॉबिस्ट सरकारी KYC मानकों में ZK-proofs (ज़ीरो-नॉलेज प्रूफ्स) को शामिल करने के लिए भारी दबाव डाल रहे हैं। यह एक "बीच का रास्ता" है, जिससे यूजर अपनी जानकारी सीधे रेगुलेटर को दिए बिना अपनी पहचान साबित कर सकेंगे—प्राइवेसी और कानून के बीच एक सुनहरा संतुलन।

6. ऑपरेशन "क्रेच द हिल": 2026 का चुनावी बजट

अगर 2024 एक "टोह लेने" (reconnaissance) जैसा था, तो मार्च 2026 तक क्रिप्टो लॉबी आधिकारिक तौर पर अमेरिका में चुनावी अभियानों की सबसे बड़ी स्पॉन्सर बन गई है। इसने तेल, गैस और फार्मास्युटिकल जैसे पारंपरिक दिग्गजों को भी पीछे छोड़ दिया है।

  • कुल खर्च: 2026 की वसंत ऋतु तक, क्रिप्टो-समितियों ने (मुख्य रूप से Fairshake PAC के माध्यम से) मध्यावधि चुनावों (Midterms) में $271 मिलियन से अधिक का निवेश कर दिया है।
  • पार्टीगत झुकाव: 2026 की एक दिलचस्प बात रिपब्लिकन पार्टी की ओर भारी झुकाव है। लगभग 40% फंड रिपब्लिकन उम्मीदवारों को दिया गया है, जबकि डेमोक्रेट्स को केवल 3% मिला है। बाकी हिस्सा "स्वतंत्र" और गैर-पक्षपाती संगठनों के बीच बांटा गया है।
  • कैलिफ़ोर्निया मिसाल: कैलिफ़ोर्निया में, जहाँ गवर्नर पद के लिए घमासान मचा है, टेक दिग्गजों ने (AI और Web3 के पीछे वाले लोगों सहित) पिछले एक साल में $39 मिलियन से अधिक खर्च किए हैं। उनका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य का राज्य प्रमुख डिजिटल संपत्ति बिलों पर 'वीटो' न लगाए।

7. लॉबिस्टों का "सीक्रेट वेपन": तकनीकी समझौता

2026 में लॉबिस्टों की भाषा "हमें आज़ादी दो" से बदलकर "हम आपको कंट्रोल देंगे, लेकिन हमारे तरीके से" हो गई है। इस रणनीति का मुख्य हथियार बना है ZK-proofs (जीरो-नॉलेज प्रूफ्स)।

लॉबिंग में इसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है:

लॉबिस्ट एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) कानूनों में ऐसे संशोधनों के लिए दबाव डाल रहे हैं जो कंपनियों को ZK-प्रोटोकॉल का उपयोग करने की अनुमति देते हैं। इससे यह साबित किया जा सकता है कि उपयोगकर्ता प्रतिबंध सूची (sanctions list) में नहीं है, और इसके लिए सरकार को उसका व्यक्तिगत डेटा भी नहीं देना पड़ता।

तकनीकी बारीकी: यह FinCEN जैसे नियामकों की शर्तों को पूरा करता है, और साथ ही हैकर्स के निशाने पर रहने वाले विशाल डेटाबेस बनाने की ज़रूरत को भी खत्म करता है। 2024-2025 में हुए मेडिकल और वित्तीय डेटा लीक (27.6 करोड़ से अधिक रिकॉर्ड) ने लॉबिस्टों को "क्रिप्टोग्राफिक प्राइवेसी" के पक्ष में एक मजबूत दलील दे दी है।

8. नए कानून: GENIUS और CLARITY

2026 में पुराने विवादों की जगह दो बुनियादी कानूनों ने ले ली है, जिनके पीछे करोड़ों डॉलर का चंदा लगा है:

  • GENIUS एक्ट (2025-2026): इस कानून ने अमेरिका में स्टेबलकॉइन्स के लिए पहला संघीय ढांचा तैयार किया। लॉबिस्टों ने ट्रेजरी और OCC को यह मनाने में सफलता पाई कि निजी स्टेबलकॉइन्स को भुगतान के "रेल" (आधार) के रूप में मान्यता दी जाए, जिससे पारंपरिक संपत्तियों के टोकनाइजेशन का रास्ता साफ हो गया।
  • Clarity एक्ट (2026): यह प्रतीक्षित बिल SEC की "धौंस जमाकर रेगुलेट करने" (regulation by enforcement) की शक्ति को खत्म करने के लिए लाया गया है। लॉबिस्ट इस बात पर जोर दे रहे हैं कि टोकन की सेकेंडरी बिक्री को सीधे 'निवेश अनुबंध' (investment contract) न माना जाए।

9. RWA टोकनाइजेशन: $450 ट्रिलियन की जंग

2026 तक ध्यान RWA (Real World Assets) पर केंद्रित हो गया है। ब्लैकरॉक (BlackRock), कॉइनबेस और फिडेलिटी (Fidelity) के लॉबिस्टों ने सिक्योरिटीज कानून को बदलने के लिए हाथ मिला लिया है।

  • लक्ष्य: टोकनाइज्ड मनी मार्केट फंड्स को 'कोलेटरल' (गारंटी) के रूप में उपयोग करने को कानूनी मान्यता दिलाना।
  • नतीजा: मार्च 2026 तक, टोकनाइज्ड संपत्तियों का बाजार $100 बिलियन को पार कर गया। अब जेपी मॉर्गन और DBS जैसे बैंक तत्काल सेटलमेंट के लिए ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं, जो केवल कानूनों की "तकनीकी तटस्थता" के लिए की गई आक्रामक लॉबिंग के कारण संभव हुआ है।

10. ग्लोबल शिफ्ट: जापान और यूरोपीय संघ

जब अमेरिका पार्टियों के बीच उलझा है, तब अन्य क्षेत्रों ने क्रिप्टो-दिग्गजों के दबाव में अपने नियम पहले ही बदल दिए हैं:

  • जापान: स्थानीय क्रिप्टो-लॉबी के दबाव में, जापान की FSA ने 2026 तक क्रिप्टो संपत्तियों को "वित्तीय उत्पादों" के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया। इसने मुनाफे पर लगने वाले 55% के भारी टैक्स को घटाकर 20% (फ्लैट) कर दिया, जिससे क्रिप्टो अब शेयरों के बराबर आ गया है।
  • यूरोपीय संघ: 1 जुलाई 2026 को MiCA की संक्रमण अवधि समाप्त हो रही है। लॉबिस्ट अब DeFi सेक्टर को "बचाने" पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, और नियामकों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि डिसेंट्रलाइज्ड प्रोटोकॉल पर वे नियम लागू नहीं होने चाहिए जो सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंजों पर होते हैं।

विश्लेषणात्मक निष्कर्ष:

2026 की क्रिप्टो-लॉबिंग अब केवल "बंदरों वाली तस्वीरों" (NFT) या सट्टा कॉइन्स को बचाने के बारे में नहीं है। यह इस बात की लड़ाई है कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली के "ऑपरेटिंग सिस्टम" का मालिक कौन होगा। आज राजनेताओं की जेबों में जो लाखों डॉलर जा रहे हैं, वह डिजिटल पैसा जारी करने और पारंपरिक बैंकों को दरकिनार कर पूंजी के प्रवाह को नियंत्रित करने के अधिकार में किया गया एक निवेश है।

Elena C.

Elena C. is the CEO of EXMON and a recognized expert in the financial technology and blockchain ecosystem, with over 12 years of experience. Her core expertise covers regulatory compliance, strategic risk management, and the integration of...

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